अंतरराष्ट्रीय कवियों ने बांधा शमां, दर्शकों के निकले ठहाके
खरसिया :- दो साल कोरोना काल की बंदिशों के बाद विजयादशमी महोत्सव के उपलक्ष्य में स्वर्गीय मुरली अग्रवाल की स्मृति में सना बजाज द्वारा अखिल भारतीय विराट हास्य कवि सम्मेलन सोमवार की देर रात अजीत सिंह नगर न्यू बस स्टैंड रोड खरसिया में शानदार आगाज हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री सुरेंद्र दुबे रायपुर, अनिल अग्रवांशी दिल्ली, सुदीप भोला जबलपुर, मनोहर मनोज कटनी, गौरी मिश्रा नैनीताल, विनय शुक्ला लखनऊ बाराबंकी, विजयादशमी महोत्सव समिति खरसिया अध्यक्ष राम नारायण सोनी, संयोजक सुनील शर्मा, अशोक अग्रवाल पत्रकार संयोजक, हरिओम शर्मा महामंत्री, सुनील बगई कोषाध्यक्ष,दीपक तारा होटल सहकोषाध्यक्ष, रमेश पप्पू, नटवर मित्तल ,गोपाल बाबा, निकुंज शराफ, जीतू ठाकुर, हरीश शर्मा, राजा मित्तल, नटवर बटरा, सोनू अग्रवाल की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसके बाद आयोजन समिति द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया।
बता दें कि आजकल कवियों के कविताओं को सुनने वालों की कमी होती जा रही है इसी बीच खरसिया नगर में शानदार कवि सम्मेलन कर कवियों के रचनाओं में जान डाल दिये। इस कार्यक्रम की शुरुआत श्रृंगार रस की युवा कवित्री गौरी मिश्रा ने विद्या की देवी मां सरस्वती वंदना से शुरुआत की तत्पश्चात कविता का जो दौर शुरू हुआ वह देर रात तक चलता रहा। नामी गिरामी छः अंतरराष्ट्रीय बड़े हास्य कवि व शायरों ने अपनी रचनाओं से खरसिया वासियों का दिल जीत लिया। हिंदी की कविताओं ने उनके दिल को छुआ और गीतों ने दर्शकों के कानों में मिश्री घोल दी। कवियों के व्यंग्य एवं कविता के माध्यम से देश प्रेम समाज निश्वार्थ भाव से सेवा की एवं नारी सशक्तिकरण देशभक्ति सहित अन्य मुद्दों के प्रति जागरूक किया। गौरी मिश्रा के जैसे गुलाबी नोट से ज्यादा गुलाबी गाल कर दूंगी, मोहब्बत से मालामाल कर दूंगी, गीत पेश किया। कवि पद्मश्री सुरेंद्र दुबे, विनय शुक्ला, अनिल अग्रवंशी, मनोहर मनोज गौरी मिश्रा, एवं सुदीप भोला के कविता पाठ के दौरान लोग सम्मेलन के खत्म होने तक अपनी-अपनी सीटों से चिपके रहे। हर व्यंग्य पर लोगों ने ठहाके तो देशभक्ति कविताओं पर जय हिंद के नारे लगाकर पूरा माहौल खुशनुमा बना दिया। कार्यक्रम के दौरान खरसिया शहर के शिक्षाविद व साहित्य प्रेमीगणों ने आयोजन समिति को इस कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रशंसा की तथा उनके इस सफल प्रयासों को काफी सराहनीय एवं साहसी कदम बताया। कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़ के हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र दुबे ने किया।









