खरसिया :- के ग्राम बिंजकोट-दर्रामुड़ा में संचालित सारदा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड कंपनी स्थानीय पर्यावरण और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। कोयले से बिजली उत्पादन करने वाली इस कंपनी द्वारा प्रतिदिन फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल को बिना किसी शुद्धिकरण के सीधे मांड नदी में छोड़ा जा रहा है। इस जहरीले पानी में कोयला, राख और डस्ट की भारी मात्रा पाई जा रही है, जो नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बर्बाद कर रहा है।

यह वही नदी है जिससे गांव के सैकड़ों लोग पीने, नहाने और घरेलू कार्यों के लिए पानी का उपयोग करते हैं। लेकिन अब सारदा कंपनी की लापरवाही के चलते यह नदी गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीणों में त्वचा रोग, पेट की बीमारियां और संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कंपनी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है। ऐसा लगता है जैसे उसे न तो पर्यावरण की चिंता है और न ही इंसानी जीवन की कोई परवाह।

स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक सारदा एनर्जी के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। यह दर्शाता है कि कंपनी खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर प्रदूषण फैला रही है और जिम्मेदार एजेंसियां भी आंख मूंदे बैठी हैं। अगर जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में इसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा।
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