मासिक वेतन वृद्धि के नाम पर 500 से 700 रुपये की उगाही… एक ही फर्म से नज़दीकी पर उठे सवाल
छाल :- एसईसीएल लात खुली खदान हमेशा से क्षेत्रीय समस्याओं—सड़क, बिजली, पानी, आवास, धूल-डस्ट, शिक्षा और स्वास्थ्य—को लेकर सुर्खियों में रहती है। इसी बीच खुली खदान विस्तार कार्य को लेकर नई गतिविधियां सामने आई हैं। केंद्र सरकार के उपक्रम एसईसीएल ने एस.के.ए. फर्म को ओबी (खदान से मिट्टी हटाने का कार्य) का नया ठेका दिया है। जबकि इससे पहले यह कार्य आर.के.एस. कंपनी द्वारा वर्षों से किया जा रहा था। साथ ही आगामी प्रोडक्शन बढ़ोतरी को लेकर महालक्ष्मी कंपनी को भी ओबी कार्य दिए जाने की चर्चा तेज़ है।
कोयले की मांग को पूरा करने की नैतिक जिम्मेदारी निभाने के लिए इन फर्मों को बड़े पैमाने पर मेन पावर की आवश्यकता है। इसी कारण विभिन्न जिलों, राज्यों और अन्य प्रांतों से कुशल-अकुशल मजदूरों को लाया गया है।
इसी दौरान क्षेत्र में मजदूर एकता सेवा समिति छाल नामक संगठन सामने आया। दावा किया जा रहा है कि संगठन मजदूरों के हितों की लड़ाई लड़ रहा है और उनकी मासिक वेतन वृद्धि में भूमिका निभाई है। लेकिन वायरल ट्रोल वीडियो के अनुसार, वेतन बढ़ाने के नाम पर 500 से 700 रुपये प्रति मजदूर वसूले जाने का गंभीर आरोप भी सामने आया है।
बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जहाँ दो कंपनियाँ ओबी कार्य कर रही हैं, वहाँ मजदूरों के वेतन में स्पष्ट विसंगति है। इसके बावजूद संगठन केवल एक ही कंपनी के मजदूरों के लिए सक्रिय है — आखिर क्यों? क्या यह मजदूर हित या किसी विशेष फर्म के हित में चल रहा खेल है? मजदूरों के हक की लड़ाई के नाम पर होने वाली वसूली अब क्षेत्र की नई चिंता बन गई है।
मजदूरों ने भी आशंका जताई है कि अगर आवाज़ उठाई तो नौकरी छिनने का खतरा है, इसलिए वे चुप रहने को मजबूर हैं।
मजदूरों के शोषण और संगठनों द्वारा वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। मजदूरों का हक सुरक्षित रहे, यह सुनिश्चित करना एसईसीएल और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
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